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डेनमार्क में यूरोपीय संघ की पहली पूर्ण-पैमाने की CO₂ भंडारण परियोजना शुरू

Greensand Future का 18 सितंबर को डेनमार्क में औपचारिक उद्घाटन हुआ। पहले चरण में सालाना 4,00,000 टन तक CO₂ संग्रहीत की जा सकती है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह परियोजना कैप्चर, परिवहन और उत्तरी सागर के नीचे स्थायी भंडारण को जोड़ती है। यह ईयू की जलवायु अवसंरचना के लिए अहम कदम है, हालांकि शुरुआती क्षमता यूरोप के कुल उत्सर्जन के मुकाबले छोटी है।

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डेनमार्क के बायोमीथेन संयंत्रों की CO₂ को तरल कर ट्रक से Esbjerg बंदरगाह और फिर लगभग 250 किलोमीटर दूर समाप्त Nini West तेल क्षेत्र ले जाया जाएगा, जहां इसे समुद्र तल से करीब 1,800 मीटर नीचे इंजेक्ट किया जाएगा।

पहला चरण सालाना 4,00,000 टन के लिए बनाया गया है। मांग और ढांचा विकसित होने पर 40–80 लाख टन तक विस्तार का लक्ष्य है, लेकिन यह भविष्य की क्षमता अभी पूरी तरह बनी नहीं है।

नॉर्वे की Northern Lights परियोजना 2025 से CO₂ जमा कर रही है, लेकिन नॉर्वे ईयू सदस्य नहीं है। इसलिए Greensand संघ के भीतर पहला पूर्ण-पैमाने का स्थल है, पूरे यूरोप का पहला नहीं।

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